चक्र शब्द सुनते ही गति, घुमाव और शक्ति का विचार आता है। लेकिन धर्म चक्र केवल घूमने वाला अस्त्र नहीं है। रामायण की अस्त्र परंपरा में यह उन दिव्य अस्त्रों में आता है जिन्हें विश्वामित्र राम को देते हैं। यह प्रसंग महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि धर्म का चक्र किसी अस्थिर या अहंकारी व्यक्ति को नहीं दिया जाता। यह उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने अनुशासन, सम्मान और तैयारी दिखाई हो।
धर्म चक्र धर्म, यानी सही व्यवस्था और न्याय से जुड़ा दिव्य चक्र है। वाल्मीकि रामायण में विश्वामित्र राम को अनेक दिव्य अस्त्रों के साथ धर्म चक्र भी देते हैं। इसका गहरा अर्थ है कि शक्ति को धर्म की सीमा में ही चलना चाहिए।
कथा
जब राम विश्वामित्र के साथ वन में जाते हैं और ऋषि के यज्ञ की रक्षा करते हैं, तब विश्वामित्र उनसे प्रसन्न होते हैं। वे राम को अनेक दिव्य अस्त्र प्रदान करते हैं। उनमें धर्म चक्र भी आता है। यह युद्ध का दृश्य नहीं, बल्कि दीक्षा का दृश्य है। राम को अस्त्रज्ञान इसलिए मिलता है क्योंकि उन्होंने विनम्रता, साहस और अनुशासन दिखाया है। इसलिए धर्म चक्र आक्रमण का साधन नहीं, बल्कि योग्य शिष्य को दिया गया विश्वास बनकर आता है।
दैनिक जीवन की सीख
दैनिक जीवन में धर्म चक्र सिखाता है कि केवल गति पर्याप्त नहीं है। प्रतिभा, इच्छा और ऊर्जा को एक केंद्र चाहिए। वह केंद्र धर्म है। जब निर्णय धर्म के चारों ओर घूमते हैं, जीवन दिशा पाता है। धर्म के बिना शक्ति भी अस्थिर हो जाती है।