अभी मेरे सामने वास्तविक तथ्य क्या है?
मौसल पर्व में यादव युवक ऋषियों का उपहास करते हैं। वे सांब को स्त्री के रूप में सजाकर पूछते हैं कि यह क्या जन्म देगी। ऋषि छल समझ जाते हैं और शाप देते हैं कि इससे लोहे का दंड उत्पन्न होगा जो कुल का नाश करेगा। उस लोहे को पीसकर फेंक दिया जाता है, फिर भी भाग्य चलता रहता है। अंत में उसी से जुड़े अवशेष विनाश का कारण बनते हैं और यादव आपस में ही नष्ट हो जाते हैं।