सम्मोहनास्त्र इसलिए याद नहीं किया जाता कि वह जलाता, काटता या कुचलता है। उसकी शक्ति अलग है। वह युद्ध को तुरंत विनाश में बदलने के बजाय रोक देता है, स्तब्ध करता है और एक विराम लाता है। महाभारत में अर्जुन इसका प्रयोग तब करते हैं जब वे महान योद्धाओं से घिरे होते हैं। यह कथा बताती है कि कभी-कभी विजय संघर्ष की गति रोकने से शुरू होती है।
सम्मोहनास्त्र महाभारत के विराट पर्व में अर्जुन द्वारा प्रयोग किया गया दिव्य अस्त्र है। यह विरोधी योद्धाओं की चेतना को स्तब्ध कर देता है और युद्ध में विराम लाता है। इसका गहरा अर्थ संयम, समय और संघर्ष पर नियंत्रण है।
कथा
विराट पर्व में अर्जुन स्वयं को प्रकट करते हैं और विराट की गौओं की रक्षा करते हुए कुरु योद्धाओं का सामना करते हैं। जब वे महान योद्धाओं से घिर जाते हैं, तब वे इंद्र से प्राप्त कहे गए सम्मोहन अस्त्र का प्रयोग करते हैं। यह अस्त्र विरोधी योद्धाओं की इंद्रियों को स्तब्ध कर देता है। उनके धनुष हाथों से गिर जाते हैं और वे युद्ध जारी रखने में असमर्थ हो जाते हैं। अर्जुन उस अवसर का उपयोग क्रूरता के लिए नहीं करते। वे युद्ध की दिशा बदलते हैं, पर अनावश्यक हत्या नहीं करते।
दैनिक जीवन की सीख
जीवन में सम्मोहनास्त्र हमें याद दिलाता है कि संघर्ष नुकसान बनने से पहले विराम लेना चाहिए। जब क्रोध बढ़े, शब्द कठोर हों या परिस्थिति गरम हो जाए, तब पहली जीत प्रतिक्रिया रोकना होती है। एक विराम गरिमा, संबंध और निर्णय शक्ति को बचा सकता है।