जृम्भणास्त्र वाल्मीकि रामायण में विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठ के विरुद्ध प्रयोग किए गए अस्त्रों में आता है। इसका अर्थ जंभाई, शिथिलता या सजगता में कमी से जुड़ता है। ऊपर से यह ध्यान कमजोर करने वाला अस्त्र लगता है। लेकिन गहराई में यह बताता है कि सुस्ती और बिना जागरूकता के जीना भी मनुष्य को सत्य से दूर कर सकता है।
जृम्भणास्त्र वह दिव्य अस्त्र है जो सजगता को कमजोर करने या शिथिलता से जुड़ा है। रामायण में इसे विश्वामित्र के अनेक अस्त्रों में गिना गया है, जिन्हें वसिष्ठ का ब्रह्मदंड शांत कर देता है।
कथा
जब विश्वामित्र वसिष्ठ के विरुद्ध अपने अस्त्रों का प्रयोग करते हैं, तो वे केवल एक अस्त्र नहीं चलाते। वे अनेक शक्तिशाली अस्त्र छोड़ते हैं, जिनमें जृम्भणास्त्र भी है। फिर भी वसिष्ठ विचलित नहीं होते। उनका ब्रह्मदंड उन अस्त्रों को अपने भीतर समा लेता है। यह कथा बताती है कि जो शक्ति ध्यान को शिथिल करती है, वह भी स्थिर साधना के सामने छोटी पड़ जाती है।
दैनिक जीवन की सीख
दैनिक जीवन में जृम्भणास्त्र हमें सचेत ठहराव की सीख देता है। हर ठहरना कमजोरी नहीं होता। बुद्धिमान ठहराव जागरूकता लाता है, लेकिन सुस्त ठहराव आलस्य बन जाता है। इसलिए प्रतिक्रिया देने से पहले रुकें, पर जिम्मेदारी से भागें नहीं।