अभी मेरे सामने वास्तविक तथ्य क्या है?
बालकांड सर्ग 56 में विश्वामित्र वशिष्ठ के विरुद्ध अनेक अस्त्र छोड़ते हैं। उन्हीं में शोषण नामक सुखाने वाला अस्त्र भी है। आक्रमण प्रबल है, लेकिन वशिष्ठ ब्रह्मदंड उठाते हैं और अस्त्रों की शक्ति शांत हो जाती है। कथा अनियंत्रित बल की प्रशंसा नहीं करती। वह दिखाती है कि सुखाने वाली शक्ति भी आध्यात्मिक स्थिरता के आगे प्रभावहीन हो सकती है।